Alexa Seleno
@alexaseleno

जगजननी जय जय

जगजननी जय! जय!! माँ! जगजननी जय! जय!!

भयहारिणि, भवतारिणि, भवभामिनि जय! जय!!

तू ही सत्-चित्-सुखमय, शुद्ध ब्रह्मरूपा

सत्य सनातन सुन्दर, पर-शिव सुर-भूपा॥

आदि अनादि अनामय, अविचल अविनाशी

अमल अनन्त अगोचर, अज आनँदराशि॥

अविकारी, अघहारी, अकल, कलाधारी।

कर्ता विधि, भर्ता हरि, हर संहारकारी॥

तू विधिबधू, रमा, तू उमा, महामाया

मूल प्रकृति विद्या तू, तू जननी, जाया

राम, कृष्ण, तू, सीता, ब्रजरानी राधा

तू वांछकल्पद्रुम, हारिणि सब बाधा

दश विद्या, नव दुर्गा, नानाशस्त्रकरा

अष्टमातृका, योगिनि, नव नव रूप धरा॥

तू परधामनिवासिनि, महाविलासिनी तू।

तू ही श्मशानविहारिणि, ताण्डवविलासिनी तू॥

सुर-मुनि-मोहिनि सौम्या, तू शोभाऽऽधारा

विकसन विकट-सरूपा, प्रलयमयी धारा

तू ही स्नेह-सुधामयी, तू अति गरल-घना।

रत्नविभूषित तू ही, तू ही अस्थि-तना॥

मूलाधारनिवासिनि, इह-पर-सिद्धिप्रदे

कालातीता काली, कमला तू, वरदे

शक्ति शक्तिधर तू ही, नित्य अभेदभयी

भेदप्रदर्शिनि वाणी, विमले! वेदत्रयी

हम अति दीन दुखी माँ!, विपत्त जाल घेरे

हैं कपूत अति कपटी, पर बालक तेरे

निज स्वभाववश जननी, दयादृष्टि कीजै।

करुणा कर करणामयि! चरण-शरण दीजै

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